गुरुवार, अगस्त 06, 2009

शकुन्तला प्रथम खंड (२) शकुन्तला मिलन


नांची कुलांची भगे हिरना, नहि राजा के आवत बा घतिया में ।
जेकर पालल पोखल बा, दुलराय खड़ा ओकरी छतिया में ॥
आश्रम आगे बा साधुन कै, मोरी सेन छुटी रहिया बटिया में ।
फिर दायीं भुजा फरकै अंखियां, कहा राम का होई इहाँ कुटिया में ॥
केहूँ बोलत ना, केहू डोलत ना, इहाँ शांति भरी सगरी जगती कै ।
पीयर - पीयर धोती झुराति, पसारली बा सुघरी धरती पै॥
खात का होइहैं इहां बन में, फल फूल इहै कुछ बा गिनती के।
देखीं तनी अगवां बढ़ी के,मठ सुघर बा केहू जोगी जाती के॥
इहाँ पांति से पांति खड़े बिरवा, गह्दी पतिया हरियाइल बाटी ।
बड बेला चमेली कै फूल फरा, सेमिया चढी खूब गवाइल बाटी ॥
बा फगुनाइल यइसे मना, कट्वो पर भंवरी मोहाइल बाटी ।
जनु आज मनावत सारे दिना, हिरनी हिरना से कोहाइल बाटी॥
फिर आगे देखाती हैं तीन सहेलरे , सींचति बाग़ सजावती बाटी।
केहू प्रियम्बदा , केहू शकुन्तला ,कहि अनुसुइया बोलावति बाटी ॥
पेड़ की ओट दबाये नरेश , ई जानि यही ओर आवति बाटी ।
नाचती बाटी ,नचावती बाटी , कि चिढ़ती बाटी ,चिढावती बाटी ॥
राजा निहारति है बनि मूरति , चाहत है केतना लेई देखीं ।
टारे टरै नहिं, पारे परै नहिं , पत्थर के पिठिया पै रेखी ॥
ई सुघराईबा या ज़दुवाई बा , ऊपर से बघराई बा शेखी ।
मोर करेज धधाई कहै ,कहा , हे बिधिना ! तोर कईसन लेखी ॥
फूल कली मुंह चूमति आवै औ , नान्हें बिरौना के फेरत आवै ।
हीलल पेड़ उडल भंवरा , डरी भागे , शकुन्तला टेरति आवै ।।
दौड़ प्रियम्बदे , हे अनुसूये ! ई , देति गोहारि औ हेरति आवै ।
माई रे माई ! ई दोषी बड़ा , भंवरा तजि फूल खदेरति आवै ॥
रीझत जलै लुकाइल राजा , मनै मन खूब नचावत गोली ।
ई सुघराई दिहे बिधिना , ऊपरा दिहले मधु घोरल बोली ॥
कौन उपाय करी कईसे सजिके , उतरै अंगना मोरे डोली ।
कूदत बा पोरसा भै करेजा , औ जीभ चलै कईसे मुह खोली ॥
प्रेम तै मारत जोर बड़ा ,बड़ी पातर धीरज कै टटिया बा ।
फांसती बा मछरी के तरे , बड़ी चोखि बा छोटि भले कंटिया बा ॥
क्षत्री बंश के राजा हयी, कुल पूजल बंश कै ई बिटिया बा ।
इहाँ शादी बियाहे कै बाते कहाँ , ई तो योग रमावे बदे कुटिया बा ॥
यही ओर विचार नरेश करै, सखिया वही ओर रिझावती बाटी ।
घेरी शकुन्तला कै देहियाँ , झकझोरी ,मरोरि खिझावति बाटी ॥
ई कचलोई नई जिनगी , हसि नाचति गावति धावति बाटी ।
बाटी लगाई लगाई कहै , मुह नोचि मजाक उडावती बाटी ॥

1 टिप्पणी:

  1. डा. त्रिपाठी जी

    बहुत बहुत धन्यवाद आ साधुवाद बा एह रुपांतरण खातिर । भोजपुरी के विकास खातिर अईसन प्रयत्न बहुत ही जरुरी बा । आ राउर एक एक शब्द मे भोजपुरी के गाथा लउकत बा जवन शकुंतला के चरित्र के बहुत नीम तरिका से उकेर के रख देत बा ।


    समय मिली त एक नजर देख लेब -
    http://www.jaibhojpuri.com/

    राउर आपने
    नवीन भोजपुरिया

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